नानक वाणी 26, Eeshvar kya karata hai.।। तदि अपना आपु आप ही उपाया.. ।। भजन भावार्थ सहित

गुरु नानक साहब की वाणी / 26

प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की भारती (हिंदी) पुस्तक "संतवाणी सटीक" एक अनमोल कृति है। इस कृति में बहुत से संतवाणीयों को एकत्रित करके सिद्ध किया गया है कि सभी संतों का एक ही मत है।  इसी हेतु सत्संग योग एवं अन्य ग्रंथों में भी संतवाणीयों का संग्रह किया गया है। जिसका शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी अन्य महापुरुषों के द्वारा किया गया हैै। यहां संतवाणी-सुधा सटीक से संत सद्गरु बाबा  श्री गुरु नानक साहब जी महाराज   की वाणी  ''तदि अपना आपु आप ही उपाया । नाँ किछुते किछु करि दिखलाया ॥,....'' का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी बारे मेंं जानकारी दी जाएगी। जिसे पूज्यपाद  छोटेलाल दास जी महाराज ने लिखा है। 

इस भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन, पद्य, वाणी, छंद)  में बताया गया है कि- वह परमात्मा अपने - आपमें अकेला है । उसने अपने को अपने से ही उत्पन्न किया है ।   इन बातों की जानकारी  के साथ-साथ निम्नलिखित प्रश्नों के भी कुछ-न-कुछ समाधान पायेंगे। जैसे कि- गुरु नानक देव जी  के भजन भावार्थ सहित, ईश्वर कैसा है कहां रहता है, ईश्वर कहाँ है और क्या करता है,ईश्वर कौन हैं , कहाँ हैं , कैसे मिलेंगे, ईश्वर के बारे में क्या कहता है,  आदि बातें। इन बातों को जानने के पहले, आइए !  सदगुरु बाबा नानक साहब जी महाराज का दर्शन करें। 


इस भजन के पहले वाले भजन ''ज्ञान खड़ग ले मनु सिउ लूझे,......'' को भावार्थ सहित पढ़ने के लिए   यहां दबाएं।


नानक वाणी भावार्थ सहित

Eeshvar kya karata hai?

सदगुरु बाबा नानक साहब जी महाराज कहते हैं कि- " वह परमात्मा (ईश्रर) अपने - आपमें अकेला है । उसने अपने को अपने से ही उत्पन्न किया है ।.... " इसे अच्छी तरह समझने के लिए इस शब्द का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी किया गया है; उसे पढ़ें-

।। अध्याय १०  ।।

तदि अपना आपु आप ही उपाया । नाँ किछुते किछु करि दिखलाया ॥ 

शब्दार्थ -तदि - तद् , तत् , वह । उपाया - उत्पन्न किया । 

भावार्थ - वह परमात्मा अपने - आपमें अकेला है । उसने अपने को अपने से ही उत्पन्न किया है । ( तात्पर्य यह कि वह स्वयं ही अपनी स्थिति का कारण है ; उसकी स्थिति का दूसरा कोई कारण नहीं है ) । उसके पास पहले से कोई सामग्री नहीं थी , फिर भी उसने ' नहीं कुछ ' से भी कुछ ( सृष्टि ) बनाकर दिखला दिया है । 

।। अध्याय ११ ।।

आसा मनसा गुर शब्दि निवारि । काम क्रोध ब्रह्म अगनी जारि ॥ जरा मरन गतु गरव निवारे । निर्मल जो ति अनूप उजारे ॥ सचे शब्दि सचि निस्तारे । लबु लोभ मिटे अभिमानु । जब सचे तषति बैठा परधानु ॥ शब्द अनाहद बाजे पंज तूरा । सतिगुर मति लै पूरी पूरा ॥ गगनि निवासि आसणु जिसु होई । नानक कहे उदासी सोई ॥ 

शब्दार्थ - मनसा - इच्छा । गत - गया हुआ , बीता हुआ , नष्ट हुआ , रहित । गरव - गर्व , अहंकार । उजारे प्रकाशित करे , प्रकट करे । निस्तारे - उद्धार करता है । लबु - लोभ , लालच । तषति - तख्त , राजगद्दी , राजसिंहासना परधानु - प्रधान , सर्वोच्च , सर्वोपरि शासक । पंज तूरा - पाँच तुरहियाँ , पाँच नौबतें , पाँच केन्द्रीय नाद । मति - बुद्धि , ज्ञान । गगन - आंतरिक आकाश , ब्रह्मांड । 

भावार्थ - सांसारिक पदार्थों से सुख पाने की आशा और इच्छाओं को गुरु के शब्द ( गुरु - ज्ञान या अनाहत नाद के ग्रहण ) से दूर करे । काम , क्रोध आदि षट् विकारों को ब्रह्माग्नि ( ब्रह्मज्योति ) में जला दे ।। बुढ़ापे और मृत्यु रहित हो जाए ; अहंकार का निवारण करे । हृदय को पवित्र करनेवाली और उपमा - रहित अंतर्योति को प्रकाशित ( प्रकट ) करे ।। सत्शब्द सचमुच उद्धार कर देता है अथवा सत्शब्द से सच्ची मुक्ति मिलती है ; लालच - लोभ और अभिमान मिट जाते हैं । सच्चे तख्त ( अविनाशी राजसिंहासन ) पर प्रधान ( सर्वोपरि शासक परमात्मा ) बैठा हुआ है अर्थात् सर्वोपरि शासक परमात्मा उस पद पर प्रतिष्ठित है , जो कभी टलता नहीं - बिनसता नहीं । उस सर्वोपरि शासक परमात्मा के स्वागत में या अभिनंदन में अनाहत नाद के सहित पाँच केन्द्रीय नादों की तुरहियाँ ( नौबतें ) बजती हैं । जो सद्गुरु का पूरा - का - पूरा ज्ञान लेकर ब्रह्मांड में निवास करता है - आसन लगाता है ( प्रतिष्ठित होता है ) , गुरु नानकदेवजी महाराज कहते हैं कि वही वास्तव में उदासी ( संसार से परम विरक्त) है।।

इस भजन के बाद वाले भजन  ''नउ दरवाजे काइआ कोट है....''   को भावार्थ सहित पढ़ने के लिए   यहां दबाएं।

प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के भारती पुस्तक "संतवाणी सटीक" के इस लेख का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि वह परमात्मा अपने - आपमें अकेला है । उसने अपने को अपने से ही उत्पन्न किया है ।  इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। निम्न वीडियो में उपर्युक्त लेख का पाठ करके सुनाया गया है।



नानक वाणी भावार्थ सहित

संतवाणी-सुधा सटीक, पुस्तक, स्वामी लाल दास जी महाराज टीकाकृत
संतवाणी-सुधा सटीक
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नानक वाणी 26, Eeshvar kya karata hai.।। तदि अपना आपु आप ही उपाया.. ।। भजन भावार्थ सहित नानक वाणी 26, Eeshvar kya karata hai.।। तदि अपना आपु आप ही उपाया.. ।। भजन भावार्थ सहित Reviewed by सत्संग ध्यान on 12/25/2020 Rating: 5

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