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P41, Atma Se Parmatma Tak "मेधा मन संग जेते दरशन।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित।

महर्षि मेंहीं पदावली / 41

      प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 41वां पद्य  "मेधा मन संग जेते दरशन।...'  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में। जिसे पूज्यपाद लालदास जी महाराज नेे किया है।
इस God भजन (कविता, पद्य, वाणी, छंद, भजन) "मेधा मन संग जेते दरशन।..." में बताया गया है कि- ईश्वर (परमात्मा) को कैसे देखें,कैसे जल्दी हो परमात्मा की प्राप्ति,जानें- कैसे देखें अपने अंदर परमात्मा,ईश्वर है,भगवान है,परमात्मा है,परमात्मा को कैसे पुकारें,ईश्वर को जाने कैसे,ईश्वर की प्राप्ति कैसे हो,ईश्वर प्राप्ति मंत्र,परमात्मा प्राप्ति मंत्र,भक्ति से ही परमात्मा की प्राप्ति,परमात्मा की प्राप्ति के उपाय,भगवान की प्राप्ति के उपाय,परमात्मा का ध्यान,परमात्मा का नाम,परमात्मा के भजन,ईश्वर के दर्शन करना चाहते हैं तो पढ़ें, Atma Se Parmatma Tak, आदि।

इस पद्य के  पहले वाले पद्य को पढ़ने के लिए  



P41,  Atma Se Parmatma Tak "मेधा मन संग जेते दरशन।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित। आत्मा परमात्मा पर विचार विमर्श करते संत
आत्मा परमात्मा पर विचार विमर्श करते संत



Atma Se Parmatma Tak

सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज जी  कहते हैं- "बुद्धि और मन के साथ रहने पर जो दर्शन और स्पर्शन (मिलाप)  होता हैं, हे साधु पुरुष! ये सभी दर्शन-स्पर्शन (मायामय) माया-संबंधी हैं अर्थात् मायिक रूपों के हैं, परम प्रभु परमात्मा के अमायिक स्वरूप के नहीं।......" इस विषय में पूरी जानकारी के लिए इस भजन का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी किया गया है। उसे पढ़ें-

P41,  Atma Se Parmatma Tak "मेधा मन संग जेते दरशन।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित। पदावली भजन 41, शब्दार्थ पदार्थ।
पदावली भजन 41, शब्दार्थ, पदार्थ।

P41,  Atma Se Parmatma Tak "मेधा मन संग जेते दरशन।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित। पदावली भजन 41, शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी।
पदावली भजन 41, शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी।


इस पद्य के  बाद वाले पद्य को पढ़ने के लिए  

प्रभु प्रेमियों !  "महर्षि मेंहीं पदावली शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी सहित" नामक पुस्तक  से इस भजन के शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी द्वारा आपने आत्मा और परमात्मा के बीच का अंतर,परमात्मा कहा है,परमात्मा का अर्थ,आत्मा परमात्मा की एकता का सिद्धांत, इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट-मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले  पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। इस पद्य का पाठ किया गया है उसे सुननेे के लिए निम्नलिखित वीडियो देखें।


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