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6/28/2020

गोरख वाणी 01 । How should a saint master be made? । अवधू ऐसा ज्ञान विचारी । भावार्थ सहित

महायोगी गोरखनाथ की वाणी / 01

      प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "संतवाणी सटीक" से महायोगी संत श्रीगोरखनाथ जी महाराज की वाणी - ' अबधू ऐसा ज्ञान विचारी,..' को भावार्थ सहित पढेंगे, सुनेंगे। जिसे सद्गुरु महर्षि  संतसेवी जी महाराज ने लिखा है।

इस God (कविता, पद्य, वाणी, छंद, भजन) "अवधू ऐसा ज्ञान विचारी,..." में बताया गया है कि- मनुष्य जीवन में संत सतगुरु की आवश्यकता क्यों है? संत सद्गुरु कैसे को बनाना चाहिए?  कौन-सा सद्गुरु जीवो का उद्धार करने में समर्थ है? गुरु बनाने में क्या सावधानी रखनी चाहिए? कैसे चुनें अपना गुरु? गुरु के गुण क्या होते है? सच्चा गुरु किसे कहते है? गुरु कैसा होना चाहिये? गुरु विचार,सही गुरु को कैसे पहचाने?Guru Hindi, गुरु कैसा होना चाहिए, गुरु दीक्षा विधि, गुरु का प्यार कैसे प्राप्त करें, प्राचीन गुरु के गुणों गुण, सच्चा गुरु किसे कहते हैं?कैसे बनाते हैं,शिव को गुरु कैसे बनाएं? किसी को अपना गुरु कैसे बनाएं, गुरु कैसे बनाते हैं, सच्चे गुरु को कैसे पहचाने, गुरु की आवश्यकता, आदि बातें। तो आइए पढ़ते हैं।

इस भजन के पहले सदगुरु मछेन्द्रनाथ जी महाराज की वाणी को  अर्थ सहित पढ़ने के लिए    यहां दबाएं।


गुरु कैसा होना चाहिए? इसपर उपदेश देते हुए महायोगी गोरखनाथ जी महाराज।
गुरु कैसा होना चाहिए?

6/24/2020

गोरख वाणी 06 । Food effect । भजन- अति अहार यंद्री बल करें । भावार्थ सहित -सद्गुरु महर्षि मेंहीं

महायोगी गोरखनाथ की वाणी / 06

    प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "संतवाणी सटीकअनमोल कृति है। इस कृति में बहुत से संतो के वाणियों को एकत्रित किया गया है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि सभी संतों के सार विचार एक ही हैं। उन सभी वाणियों का टीकाकरण किया गया है। आज महायोगी गोरखनाथ की वाणी "अति अहार यंद्री बल करें...' भजन का भावार्थ  पढेंगे। 

महायोगी गोरखनाथ जी महाराज की इस God भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन,भजन कीर्तन, पद्य, वाणी, छंद) "अति अहार यंद्री बल करें।,..." में बताया गया है कि- भोजन के प्रभाव आम तौर पर सबसे अधिक होते हैं।जैसा खाये अन्न, वैसा बने मन। मन और शरीर पर खाना खाने का क्या प्रभाव पड़ता है? इसे समझने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करना पड़ेगा- भोजन का परिभाषा, पौष्टिक आहार, संतुलित भोजन,भोजन का नुक़सान,अन्न का मन पर प्रभाव हमारे भोजन और स्वास्थ्य पर निबंध, भोजन हमारे लिए क्यों आवश्यक है,पर्याप्त आहार क्या है,आहार के प्रमुख घटक एवं स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन करें,मन का शरीर पर प्रभाव,हम भोजन क्यों करते हैं,भोजन के अवयव,समाज में स्वास्थ्य एवं पोषण की धारणा आदि बातें।

इस भजन के पहले वाले पद्य को पढ़ने के लिए  यहां दबाएं


गोरख वाणी, भजन, अति अहार यंद्री बल करें, महायोगी गोरखनाथ जी महाराज और भोजन चर्चा।
महायोगी गोरखनाथ जी महाराज और भोजन चर्चा

6/23/2020

गोरख वाणी 05 । Speech with mystical yoga । हँसिबा खेलिबा धरिबा ध्यान । भावार्थ सहित -महर्षि मेंहीं

महायोगी गोरखनाथ की वाणी / 05

    प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "संतवाणी सटीकअनमोल कृति है। इस कृति में बहुत से संतो के वाणियों को एकत्रित किया गया है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि सभी संतों के सार विचार एक ही हैं। उन सभी वाणियों का टीकाकरण किया गया है। आज महायोगी गोरखनाथ की वाणी "हँसिबा खेलिबा धरिबा ध्यान।...' भजन का भावार्थ  पढेंगे। 

महायोगी गोरखनाथ जी महाराज की इस God भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन,भजन कीर्तन, पद्य, वाणी, छंद) "हँसिबा खेलिबा धरिबा ध्यान।..." में बताया गया है कि- महान चमत्कारिक और रहस्यमयी योग युक्तियों से युक्त है । जब हम योग शब्द सुनते है तो हमारे मन में रहस्यमय विद्या, रहस्यमयी ग्रन्थ, हजारों वर्ष जीवित रखनेवाली रहस्यमयी विद्या,साधना रहस्य, Rahasya May Gyan,  गुप्त साधना, लययोग, हठयोग सिद्धि के लक्षण, इत्यादि के बारे में विचार करने लगता है। लेकिन इस पद में महायोगी गुरु गोरखनाथ जी महाराज योग के संबंध में जो बातें बताए हैं, वह निम्नलिखित प्रश्नों से मिलता जुलता है जैसे कि- योग की शक्तियां कैसे प्राप्त करें, लय योग क्या है? साधारण से साधारण व्यक्ति योग से कैसे लाभ ले सकता है? इत्यादि बातें।

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हँसिबा खेलिबा धरिबा ध्यान, महायोगी गोरखनाथ जी महाराज बानी का उच्चारण करते हुए।
हँसिबा खेलिबा धरिबा ध्यान,

6/21/2020

गोरख बाणी 04 । How to chant Sumiran । ऐसा जाप जपो मन लाई । भावार्थ सहित -महर्षि मेंहीं

महायोगी गोरखनाथ की वाणी / 04

    प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "संतवाणी सटीकअनमोल कृति है। इस कृति में बहुत से संतो के वाणियों को एकत्रित किया गया है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि सभी संतों के सार विचार एक ही हैं। उन सभी वाणियों का टीकाकरण किया गया है। आज महायोगी गोरखनाथ की वाणी "ऐसा जाप जपो मन लाई।...' भजन का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी पढेंगे। 

महायोगी गोरखनाथ जी महाराज की इस God भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन,भजन कीर्तन, पद्य, वाणी, छंद) "आवै संगै जाइ अकेला।,..." में बताया गया है कि- नाम जप से अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति संभव है, परंतु वह नाम जप कैसे करना चाहिए? उसे किस विधि से करना चाहिए? मानसिक जप कैसे करे?सवा लाख जप करें या अधिक,  राम नाम का अजपा जाप,भगवान का नाम जप की प्रक्रिया कैसे बड़े,अजपा जप क्या है?गायत्री मंत्र का मानसिक जप,ॐ का मानसिक जप,माला जाप कैसे करें,राम हमारा जप करे।  जैसे कई सवाल है, जिसका उत्तर महायोगी गोरखनाथ जी महाराज ने इस पद्य में दिया है।

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महायोगी गोरखनाथ जी महाराज, How to chant Sumiran
महायोगी गोरखनाथ जी महाराज 

गोरख बाणी 03 । Why should you become a monk? । आवै संगै जाइ अकेला । भावार्थ सहित -सदगुरु महर्षि मेंहीं

महायोगी गोरखनाथ की वाणी / 03

    प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "संतवाणी सटीकअनमोल कृति है। इस कृति में बहुत से संतो के वाणियों को एकत्रित किया गया है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि सभी संतों के सार विचार एक ही हैं। उन सभी वाणियों का टीकाकरण किया गया है। आज महायोगी गोरखनाथ की वाणी "आवै संगै जाइ अकेला,...' भजन का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी पढेंगे। 

महायोगी गोरखनाथ जी महाराज की इस God भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन,भजन कीर्तन, पद्य, वाणी, छंद) "आवै संगै जाइ अकेला।,..." में बताया गया है कि- साधु बनने के लिए मनुष्य की मानसिक स्थिति कैसी होनी चाहिए? लोग किन-किन परिस्थितियों में साधु बन जाते हैं?भारत में साधुओं की मर्यादा क्या है?सबसे बड़ा साधु-संत कौन है? इन प्रश्नों के साथ-साथ निम्नलिखित बातों पर भी कुछ ना कुछ है चर्चा किया गया है।गोरखपदावली भजन, गोरख वाणी,साधु कैसे बने,साधु कितने प्रकार के होते हैं,सबसे बड़ा साधु,कुंभ में नागा साधु,जैन नागा साधु, गिरनारी नागा बाबा,नागा बाबा मंदिर,साधु के गुण,साधु कितने प्रकार के होते हैं,साधु का अर्थ,अघोरी साधु,भारत में साधुओं की संख्या,साधु का मंत्र,साधु कैसे बने, साधु-संत, भारत के साधु संत,साधु शब्द रूप,जमाना का अर्थ,साधु वीडियो आदि बातें।

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गोरख वाणी-साधु कैसे बने, महायोगी गोरखनाथ संतो के साथ,
गोरख वाणी-साधु कैसे बने?

6/20/2020

गोरख बाणी 02 । How is the divine । बस्ती न शुन्यं शुन्य न बस्ती । भावार्थ सहित।

महायोगी गोरखनाथ की वाणी / 02

    प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "संतवाणी सटीकअनमोल कृति है। इस कृति मैं बहुत से संतो के वाणियों को एकत्रित किया गया है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि सभी संतों के सार विचार एक ही हैं। उन सभी वाणियों का टीकाकरण किया गया है। आज 

महायोगी गोरखनाथ की वाणी "बस्ती न शुन्यं शुन्य न बस्ती,...' भजन का भावार्थ पढेंगे। 

महायोगी गोरखनाथ जी महाराज की इस God भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन,भजन कीर्तन, पद्य, वाणी, छंद) "बस्ती न शुन्यं शुन्य न बस्ती।,..." में बताया गया है कि- ईश्वर भक्ति का असली भेद जो वेदों-पुराणों में, सभी पहुंचे हुए संत-महात्माओं की वाणियों में और गीता-रामायण आदि धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है। वह असली भेद क्या है? उस भेद की प्राप्ति कैसे होगी? ईश्वर का स्वरूप, परमात्मा कौन है? ईश्वर भक्ति का असली भेद,ईश्वर का स्वरूप,ईश्वर का स्वरूप,ईश्वर का शाब्दिक अर्थ,ईश्वर कौन है,वेदों में ईश्वर का स्वरूप,सबसे बड़ा ईश्वर कौन है,वेदों के अनुसार ईश्वर कौन है,ईश्वर एक है,ईश्वर का रहस्य आदि बातें।

इस भजन के पहले वाले पद्य को पढ़ने के लिए  यहां दबाएं

महायोगी गोरखनाथ जी महाराज, ईश्वर स्वरूप पर प्रवचन करते महायोगी गोरखनाथ जी महाराज।
महायोगी गोरखनाथ जी महाराज

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