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6/25/2020

P89-How do guru-भजो साध गुरु साध गुरु साध गुरु ऐ- महर्षि मेंहीं पदावली - God Bhajan अर्थ सहित

महर्षि मेंहीं पदावली / 89

       प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 89वें पद्य  "भजो साध गुरु साध गुरु साध गुरु ऐ,....''  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में। जिसे पूज्यपाद लालदास जी महाराज नेे किया है।

इस God (कविता, पद्य, वाणी, छंद, भजन) "सर्वेश्वरं सत्य शांति स्वरूपं,..." में बताया गया है कि- कैसे चुनें अपना गुरु? गुरु के गुण क्या होते है? सच्चा गुरु किसे कहते है? गुरु कैसा होना चाहिये? गुरु विचार,सही गुरु को कैसे पहचाने?Guru Hindi, गुरु कैसा होना चाहिए, गुरु दीक्षा विधि, गुरु का प्यार कैसे प्राप्त करें, प्राचीन गुरु के गुणों गुण, सच्चा गुरु किसे कहते हैं?कैसे बनाते हैं,शिव को गुरु कैसे बनाएं? किसी को अपना गुरु कैसे बनाएं, गुरु कैसे बनाते हैं, सच्चे गुरु को कैसे पहचाने, गुरु की आवश्यकता, गुरु कैसे होते हैं? गुरु क्या-क्या कर सकते हैं? गुरु कौन हो सकते हैं? सतगुरु कौन है? असली गुरु कौन है? पूर्ण गुरु कौन है?सद्गुरु कौन है? गुरु की आवश्यकता क्या है? आदि बातें। तो आइए पढ़ते हैं। 

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गुरु के गुणों का बखान करते हुए गुरुदेव, सद्गुरु महर्षि मेंही गुरु गुणगान करते, महर्षि मेंहीं भजन गाते हुए,
गुरु के गुणों का बखान करते हुए सदगुरुदेव

6/24/2020

P109-Fruit of the guru's service-सतगुरु सेवत गुरु को सेवत-पदावली भजन अर्थ सहित

महर्षि मेंहीं पदावली / 109

प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" के 109वां भजन-"सतगुरु सेवत गुरु को सेवत, मिटत सकल दुख झेला रे,....'  का पूज्यपाद स्वामी संतसेवी जी महाराज एवं पूज्य पाद लाल दास जी महाराज का किया हुआ शब्दार्थ , भावार्थ और टिप्पणी के बारे में।

महर्षि मेंहीं पदावली के इस भजन से साफ झलकता है कि गुरु सेवा का महत्व क्या है? गुरु सेवा क्या है? गुरु सेवा, गुरु सेवा का महत्व, मात पिता गुरु सेवा, गुरु मेरी पूजा, गुरु सेवा कशी करावी, गुरु सेवा ते भगत कमाई, गुरु सेवा ते भक्ति कमाई,सेवा का महत्व - साखी,गुरु सेवा की महिमा, guru ki mahima ke dohe in hindi, guru ki mahima in hindi, गुरु की सेवा सफल है,सतगुरु की सेवा सफल है, महर्षि मेंही भजन आदि बातें।

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सद्गुरु महर्षि मेंही निवास, महर्षि मेंही आश्रम कुप्पाघाट का एक दृश्य,
सद्गुरु महर्षि मेंही निवास

6/18/2020

P14, Description of qualities worthy of Sadhguru "नमामि अमित ज्ञान,..." महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित

महर्षि मेंहीं पदावली / 14

      प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 14 वां, पद्य- "नमामि अमित ज्ञान,..." का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में। जिसे पूज्यपाद लालदास जी महाराज नेे किया है।
इस सद्गुरु-स्तुति (कविता, पद्य, वाणी, छंद, भजन) "नमामि अमित ज्ञान,..." में बताया गया है कि- सतगुरु महाराज का स्तुति,महर्षि मेंहीं का स्तुति,महर्षि मेंही का स्तुति विनती,संतमत,Sadhguru Hindi,निखिल मंत्र विज्ञान,गुरु के गुण,गुरु को समर्पित, Definition of Guru,Qualities of Guru,क्या होता है गुरु का अर्थ,सच्चा गुरु कैसा होना चाहिए,गुरु किसे कहते है,गुरु बनाने के नियम, गुरु और शिष्य का संबंध,guru हिंदी,गुरु आखिर गुरु होता है,आत्म ज्ञान कैसे होता है,गुरु कैसे बनाएं आदि।

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P14, Description of qualities worthy of Sadhguru "नमामि अमित ज्ञान,..." महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित। सद्गुरु महर्षि मेंहीं और टीकाकार लाल दास जी महाराज
सद्गुरु महर्षि मेंहीं और टीकाकार लाल दास जी महाराज

6/17/2020

P111, Importance of the Guru's grace, "बिना गुरु की कृपा पाये,...'' महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित

महर्षि मेंहीं पदावली / 111

    प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 111वां पद्य  "बिना गुरु की कृपा पाये....''  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में; जिसे पूज्यपाद लालदास जी महाराज नेे किया है। 

इस गुरु कृपा भजन ( गुरु भजन, गुरु का महत्व की कविता, गुरु कृपा पंद्य, गुरु कृपा वाणी ) में  जीवन में गुरु का महत्व, गुरु और शिष्य का संबंध, गुरु कृपा ही केवलम, गुरु का अर्थ, गुरु कृपा सड़क पर पड़ी नहीं मिलती, गुरु कौन है? सद्गुरु कौन है? असली गुरु कौन है? पूर्ण गुरु कौन है? गुरु की आवश्यकता क्यों है? आदि बातों का कुछ-ना-कुछ  समाधान दिया गया है।

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P111, Importance of the Guru's grace, "बिना गुरु की कृपा पाये,...''  महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित। जीवन में गुरु कृपा की आवश्यकता पर चर्चा करते गुरुदेव।
जीवन में गुरु कृपा की आवश्यकता पर चर्चा करते गुरुदेव।

6/10/2020

P112, (ख) guru bhajan-guru bhakti geet, "करिये भाई सतगुरु गुरु पद सेवा,..." महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित

महर्षि मेंहीं पदावली / 112

      प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 112 वें पद्य  "करिये भाई सतगुरु गुरु पद सेवा....''  का शब्दार्थ, भावार्थ के  बारे में। जिसे पूज्यपाद श्रीधर दास जी महाराज नेे किया है।

इसमें बताया गया है- धर्मशास्त्र कहता है- "तेषु सर्वप्रत्नेन सेव्यो हि परमो गुरुः" "गुरु बिना गति नस्ति" इससे गुरु महिमा प्रत्यक्ष है। ब्रह्म निष्ठ गुरु की सेवा का महत्त्व, गुरु कृपा प्राप्त व्यक्ति ही समझ सकता है। इससे गुरु के प्रति पवित्र प्रेम, इत्यादि की जानकारी होती है। संत सद्गुरु की सेवा से क्या-क्या लाभ होता है। गुरु से गुरु विमुख लोगों की गति,गुरु के प्रति पवित्र प्रेम,ब्रह्म निष्ठ गुरु की सेवा का महत्व इत्यादि की जानकारी होती है। तेषु सर्वप्रत्नेन सेव्यो हि परमो गुरुः,Guru Bina Gati Nasti,गुरु बिना गति नस्ति,काल पर कविता,भक्ति करे कोई सूरमा,मन पर कविता,शब्द की महिमा पर शायरी,कबीर कविता कोश,मध्ययुगीन काव्य भक्ति महिमा,जीवन कविता कोश,भक्ति पर कविताएं इत्यादि बातें।

इस भजन का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी पूज्यपाद छोटेलाल दास जी महाराज जी महाराज ने भी किया है, उसे पढ़ने के लिए          यहां दबाएं।

P112,guru bhajan-guru bhakti geet, करिये भाई सतगुरु गुरु पद सेवा,महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित
गुरुदेव के विभिन्न रूप

P112, Speed of people Guru alienated "करिए भाई सतगुरु गुरु पद सेवा।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित।

महर्षि मेंहीं पदावली / 112

प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 112वां पद्य  "करिए भाई सतगुरु गुरु पद सेवा।....''  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में। जिसे पूज्यपाद लालदास जी महाराज नेे किया है।

इस Santmat meditations भजन (कविता, पद्य, वाणी, छंद) "करिए भाई सतगुरु गुरु पद सेवा।,..." में बताया गया है कि- गुरु विमुख लोगों की गति क्या होती है? मौत निश्चित है, फिर व्यक्ति को ऐसा कौन-सा काम करना चाहिए, जिससे लोक-परलोक सुधर जाए? इत्यादि बातों के साथ-साथ निम्नलिखित प्रश्नें भी विचारनीय हैं- भजन अर्थ सहित, कुप्पाघाट का भजन, करिए भाई सतगुरु गुरु पद सेवा, निगुरा की गति, गुरु विमुख लोगों की गति,तेषु सर्वप्रत्नेन सेव्यो हि परमो गुरुः,Guru Bina Gati Nasti,गुरु बिना गति नस्ति,गुरु के प्रति पवित्र प्रेम,गुरुभक्तियोग,ब्रह्म निष्ठ,काल पर कविता,भक्ति करे कोई सूरमा,मन पर कविता,शब्द की महिमा पर शायरी,कबीर कविता कोश,मध्ययुगीन काव्य भक्ति महिमा,जीवन कविता कोश,भक्ति पर कविताएं।

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P112, (क)  Speed of people  Guru alienated "करिए भाई सतगुरु गुरु पद सेवा।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित।

3/01/2020

P114, Characteristics of ancient guru "सम दम और नियम यम दस दस।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित।

महर्षि मेंहीं पदावली / 114

प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 114वां पद्य  "सम दम और नियम यम दस दस।....''  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में। जिसे पूज्यपाद श्रीधर दास जी महाराज और पूज्यपाद संतसेवी जी महाराज  नेे किया है।

इस Santmat meditations भजन (कविता, पद्य, वाणी, छंद) "सम दम और नियम यम दस दस,..." में बताया गया है कि- पूरे एवं सच्चे सद्गुरु की प्राप्ति से क्या-क्या लाभ होते हैं? संत सद्गुरु शिशु को क्या-क्या प्रदान करते हैं। इत्यादि बातों के साथ-साथ निम्नलिखित प्रश्नें भी विचारनीय हैं- सद्गुरु से होने वाले लाभ,सद्‌गुरु का परिचय, Sadhguru Intro, Sadhguru Hindi, कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता क्यों नहीं,सफल होने की एक शानदार ट्रिक,सद्गुरु प्रवचन,सद्गुरु वीडियो,प्राचीन गुरु की विशेषताएं,गुरु और शिष्य का रिश्ता, गुरु शिष्य संबंध निबंध,गुरु शिष्य सम्बन्ध पर निबंध,गुरु और शिष्य का पारस्परिक संबंध,गुरु शिष्य की कहानियाँ,गुरु शिष्य परंपरा मराठी,गुरु शिष्य परंपरा पर निबंध,गुरु की परिभाषा,गुरु दक्षिणा की परंपरा,शिष्य के गुण,गुरु दक्षिणा की कहानी।

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प्राचीन गुरु की सेवा से लाभ पर चर्चा।

P113, Search for sadhguru "आगे माई सतगुरु खोज करहु सब मिलिके।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित।

महर्षि मेंहीं पदावली / 113

प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 113वां पद्य  "आगे माई सतगुरु खोज करहु सब मिलिके।....''  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में। जिसे पूज्यपाद श्रीधर दास जी महाराज और पूज्यपाद संतसेवी जी महाराज  नेे किया है।

इस Santmat meditations भजन (कविता, पद्य, वाणी, छंद) "आगे माई सतगुरु खोज करहु सब मिलिके,..." में बताया गया है कि- मनुष्य जन्म को सफल बनाने का एकमात्र उपाय है-- संत सतगुरु की खोज करके उनकी शरण ग्रहण करना। इत्यादि बातों के साथ-साथ निम्नलिखित प्रश्नें भी विचारनीय हैं- प्राचीन गुरु की विशेषताएं,गुरु बनाने के नियम,सच्चे गुरु को कैसे पहचाने,सच्चा गुरु किसे कहते हैं,सच्चा शिष्य,गुरु,गुरु की खोज कैसे करें,गुरु महात्म्य,सद्गुरु की खोज,कैसे चुनें अपना गुरु,सच्चे गुरु की खोज कैसे करे, sachche guru ki khoj kaise kare,गुरु की आवश्यकता क्यों है,आध्यात्मिक गुरु कों किस तरह पसंद करना चाहिए,गुरु की पहचान,गुरु के बताये रास्ते पर चल कर ही भगवान तक पहुँच,मानव जीवन में गुरु की आवश्यकता,गुरु की परिभाषा,गुरु बनाना क्यों जरूरी है,प्राचीन गुरु की विशेषता।

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P113, Search for sadhguru "आगे माई सतगुरु खोज करहु सब मिलिके।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित। गुरु भक्ति में लीन संतसेवी जी महाराज
गुरु भक्ति में लीन संतसेवी जी महाराज


2/29/2020

P110, Who is the luckiest in the world "सतगुरु पद बिनु गुरु भेटत नाहीं।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित।

महर्षि मेंहीं पदावली / 110

प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 110 वां पद्य  "सतगुरु पद बिनु गुरु भेटत नाहीं।....''  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में। जिसे पूज्यपाद लालदास जी महाराज नेे किया है।

इस Santmat meditations भजन (कविता, पद्य, वाणी, छंद) "सतगुरु पद बिनु गुरु भेटत नाहीं,..." में बताया गया है कि- महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित के अनुसार दुनिया में सबसे भाग्यशाली व्यक्ति कौन है? जो अपने सभी दुखों से छुटकारा पाने का उपाय जानता है और उसके अनुसार चल रहा है? । इत्यादि बातों के साथ-साथ निम्नलिखित प्रश्नें भी विचारनीय हैं- सत्संग ध्यान,महर्षि मेंहीं पदावली, भजन अर्थ सहित, कुप्पाघाट का भजन,आदिगुरु परमात्मा, संत सतगुरु और शिष्य, सत साहेब कौन है,सतलोक कैसा है,सत सुकृत अविगत कबीर,शब्द स्वरूपी राम,श्रीराम जी का सबसे बड़ा भाग्यशाली भक्त कौन है,सबसे भाग्यशाली व्यक्ति कौन है? सबसे महान व्यक्ति तथा सबसे भाग्यशाली इंसान कौन है?आपके अनुसार दुनिया में सबसे भाग्यशाली व्यक्ति कौन है?सबसे बड़ा भाग्यशाली कौन है, Sabse Bada Bhagyashali Kon hai.

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P110, Who is the luckiest in the world "सतगुरु पद बिनु गुरु भेटत नाहीं।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित। सबसे बड़ा भाग्यशाली कौन विषय पर चर्चा करते गुरुदेव।
सबसे बड़ा भाग्यशाली कौन बिषय पर चर्चा करते गुरुदेव।

P108, The significance of human birth from Guru Bhajan "गुरु को सुमिरो मीत,..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित।

महर्षि मेंहीं पदावली / 108

प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 108 वां पद्य  "गुरु को सुमिरो मीत....''  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में। जिसे पूज्यपाद लालदास जी महाराज नेे किया है।
इस भजन (कविता, पद्य, वाणी, छंद) "गुरु को सुमिरो मीत,..." में बताया गया है कि- मनुष्य जन्म की सार्थकता ईश्वर भजन करने से है। ईश्वर भजन से सभी दु:खों से मुक्ति प्राप्त होती है । इत्यादि बातों के साथ-साथ निम्नलिखित प्रश्नें भी विचारनीय हैं- भजन अर्थ सहित, कुप्पाघाट का भजन, मनुष्य जन्म की सार्थकता, समय का सदुपयोग,मानव जीवन की सार्थकता पर निबंध,मनुष्य जन्म क्यों मिला है,मनुष्य का जन्म क्यों हुआ है,मनुष्य जन्म क्यों लेता है,हमारा जन्म किसलिए हुआ है,मेरा जन्म क्यों हुआ,जन्म क्या है,स्त्री जीवन की सार्थकता,मनुष्य के जन्म की कहानी 
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P108, The significance of human birth from Guru Bhajan "गुरु को सुमिरो मीत,..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित। मनुष्य जन्म की सार्थकता पर चर्चा करते गुरुदेव।
मनुष्य जन्म की सार्थकता पर चर्चा करते गुरुदेव।

P104, All sin destroyer mantra "सतगुरु सतगुरु नितहि पुकारत,..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित।

महर्षि मेंहीं पदावली / 104

      प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 104वां पद्य  "सतगुरु सतगुरु नितहि पुकारत,...'  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में। जिसे पूज्यपाद लालदास जी महाराज नेे किया है।


इस Santmat meditations भजन (कविता, पद्य, वाणी, छंद) "सतगुरु सतगुरु नितहि पुकारत,..." में बताया गया है कि- समस्त पाप नाशक मंत्र 'सतगुरु सतगुरु' की पुकार करना है?गुरु मंत्र का सदैव जप करते रहने पर मन में पवित्रता आती जाती है और होते रहने वाले पापों की ओर से मनोवृति हटती जाती है। इत्यादि बातों के साथ-साथ निम्नलिखित प्रश्नें भी विचारनीय हैं- सत्संग ध्यान,महर्षि मेंहीं पदावली, भजन अर्थ सहित, कुप्पाघाट का भजन, सतगुरु सतगुरु नितहि पुकारत,सतगुरु सतगुरु बोल बंदे क्या लागे है मोल,बंदे सतगुरु सतगुरु बोल,सतगुरु सतगुरु सतगुरु,पाप नाश मंत्र,समस्त पाप नाशक मंत्र,पाप मुक्ति मंत्र,पाप निवारण मंत्र,प्रायश्चित मंत्र,समस्त पाप निवारण स्तोत्र,पाप प्रशमन स्तोत्र,दिव्य स्तोत्र,दारिद्रय नाशक मंत्र,पाप से मुक्ति के उपाय,समस्त पापनाशक स्तोत्र pdf,प्रायश्चित करने के उपाय।

इस पद्य के  पहले वाले पद्य को पढ़ने के लिए  

P104, All sin destroyer mantra "सतगुरु सतगुरु नितहि पुकारत,..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित। समस्त पाप नाशक मंत्र पर विचार विमर्श करते सदगुरुदेव और टीकाकार।
समस्त पाप नाशक मंत्र पर विचार करते सदगुरुदेव।

2/28/2020

P103, Saint Sadhguru's Tip "जीव उद्धार का द्वार पुकार कहा,..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित।

महर्षि मेंहीं पदावली / 103

      प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 103वां पद्य  "जीव उद्धार का द्वार पुकार कहा,...'  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में। जिसे पूज्यपाद लालदास जी महाराज नेे किया है।


इस Santmat meditations भजन (कविता, पद्य, वाणी, छंद) "जीव उद्धार का द्वार पुकार कहा,..." में बताया गया है कि- संत सतगुरु अपने शिष्यों का कल्याण किन नियुक्तियों से करते हैं? भक्त शिष्य का कल्याण कैसे होता है? इत्यादि बातों के साथ-साथ निम्नलिखित प्रश्नें भी विचारनीय हैं- सत्संग ध्यान,महर्षि मेंहीं पदावली, भजन अर्थ सहित, कुप्पाघाट का भजन, 
संत सद्गुरु की युक्ति से दुखों से मुक्ति का उपाय,दुखों से मुक्ति,Dukho se mukti, मुक्ति की युक्ति, Mukti Ki Yukti,दुःख चिंता से मुक्ति चाहिए तो ये उपाय जरुर करें,
गुरुदेव ने स्वप्न में दी ऐसी युक्ति जिससे हो गई सब दुखो,दुखों से निवृति का अचूक उपाय।

इस पद्य के  पहले वाले पद्य को पढ़ने के लिए  

P103, Saint Sadhguru's Tip "जीव उद्धार का द्वार पुकार कहा,..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित। भक्तों के कल्याण की युक्तियों पर चर्चा करते गुरुदेव।
भक्तों के कल्याण की उक्तियों पर चर्चा करते गुरुदेव।


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