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P74, How to control your mind "मन तुम बसो तीसरो नैना।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित।

महर्षि मेंहीं पदावली / 74

      प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 74वां पद्य  "मन तुम बसो तीसरो नैना।...'  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में। जिसे पूज्यपाद लालदास जी महाराज नेे किया है।
इस Santmat meditations भजन (कविता, पद्य, वाणी, छंद) "मन तुम बसो तीसरो नैना।..." में बताया गया है कि-  वैदिक ऋषि, सभी पहुंचे हुए संत-महात्मा और अध्यात्मिक धर्म ग्रंथों में मन को बस में करने का प्रमाणिक उपाय क्या बताया गया है? जो निरापद और करने में आसान है।  2 Ways to Take Control of Your Mind, Better control your mind,  Your Mind Control Your Life Control,How do we control our own thoughts, How to control my heart and mind,How can we control our mind? Wouldn't the world be easier if ...,How to control my mind, thoughts and body, How to Control Your Mind, how to control mind in hindi, आदि बातें।


इस पद्य के  पहले वाले भाग को पढ़ने के लिए  
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P74, How to control your mind  "मन तुम बसो तीसरो नैना।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित। मन को बस में करने के उपाय पर चर्चा करते गुरुदेव।
मन को बस में करने के उपाय पर चर्चा करते गुरुदेव



How to control your mind in hindi

सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज जी  कहते हैं- "हे मेरे मन तुम जागृत काल में तीसरे नेत्र (दशम द्वार) में निवास करते हो। दृष्टियोग की साधना करके तुम वहां से आंतरिक आकाश में ऊपर की ओर उठ चलो।....." इस विषय में पूरी जानकारी के लिए इस भजन का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी किया गया है। उसे पढ़ें-

P74, How to control your mind  "मन तुम बसो तीसरो नैना।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित। पदावली भजन 74 और शब्दार्थ, भावार्थ। मन वर्णन।
पदावली भजन 74 और शब्दार्थ, भावार्थ । मन वर्णन।

P74, How to control your mind  "मन तुम बसो तीसरो नैना।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित। पदावली भजन 74 का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी समाप्त।
पदावली भजन 74 का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी समाप्त।


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महत्वपूर्ण नोट-



* मन भीतर की चार इंद्रियों (इंद्रियां 14 है। पांच ज्ञानेंद्रियां- आंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा; पांच कर्मेंद्रियां- हाथ, पैर, मुंह, गुदा और लिंग और चार अंतःकरण- मन बुद्धि चित्त और अहंकार।) में से एक है। जिसकी मुख्य वृत्ति है प्रस्ताव करना, गुनावन करना या संकल्प-विकल्प करना। (जागृत और स्वप्न-अवस्थाओं में धाराप्रवाह उल्टी-सीधी बातों का मन में आते रहना मन का संकल्प विकल्प करना है।)
* मन बड़ा भोला है। वह कुछ निर्णय नहीं कर पाता, वह संदेह में पड़ा हुआ रहता है। कभी कहता है कि यह है और कभी कहता है कि यह नहीं है। वह द्वंद-दुविधा के हिंडोले पर झूलता रहता है। मन संकल्प-विकल्प करता रहता है। किसी पदार्थ के बारे में कोई निश्चित कल्पना या विचार करना संकल्प है, फिर उसी के बारे में विरुद्ध दूसरी-दूसरी बातें सोचना विकल्प है। 
* मन जब किसी निश्चय पर नहीं पहुंच पाता है, तब बुद्धि सामने आती है और पूर्व अनुभव के आधार पर तर्क-वितर्क करके अंतिम निर्णय प्रस्तुत करती है।
* ध्यान अभ्यास शुरू करने के पहले किसी सच्चे गुरु से दीक्षा लेना अति आवश्यक है। नहीं तो इसमें कई तरह के नुकसान हो सकते हैं?

प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के भारती पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" के भजन नं. 74 का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के द्वारा आप ने जाना कि वैदिक ऋषि, सभी पहुंचे हुए संत-महात्मा और अध्यात्मिक धर्म ग्रंथों में मन को बस में करने का प्रमाणिक उपाय क्या बताया गया है, जो निरापद और करने में आसान है।। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले  पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। इस पद का पाठ किया गया है उसे सुननेे के लिए निम्नलिखित वीडियो देखें।




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P74, How to control your mind "मन तुम बसो तीसरो नैना।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित। P74, How to control your mind  "मन तुम बसो तीसरो नैना।..." महर्षि मेंहीं पदावली अर्थ सहित। Reviewed by सत्संग ध्यान on 1/08/2020 Rating: 5

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