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P86, How do sadguru happen 'भजो हो मन गुरु उधार, ...' महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित

महर्षि मेंहीं पदावली /86


      प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 86 वें पद्य  "भजो हो मन गुरु उधार, भव अपार तारनं....''  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में। जिसे पूज्य पाद संतसेवी जी महाराज और पूज्य पाद  पूज्यपाद लालदास जी महाराज नेे किया है। 
इस भजन में संत सद्गुरु कैसे होते हैं इस बारे में बताया गया है लेकिन लोगों की जिज्ञासा होती है कि वे निम्न प्रश्नों का उत्तर दें। लेकिन इन प्रश्नों का सार उत्तर इसमें आ गया है।
where will i be after death? sadhguru, sadhguru there is no death, does sadhguru believe in reincarnation, sadguru video on death, how life leaves the body after death,sadhguru on conception, sadhguru on mortality what happens after death quora.

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P86, How do sadguru happen 'भजो हो मन गुरु उधार, ...' महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित। सद्गुरु महर्षि मेंहीं भक्तों को उपदेश करते हुए।
सद्गुरु महर्षि मेंहीं भक्तों को उपदेश करते हुए।

How do sadguru happen 'भजो हो मन गुरु उधार, .

सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज जी  कहते हैं-कि हे मेरे प्रिय जनों ! मनुष्य जीवन में गुरुदेव का बड़ा ही महत्व है। गुरुदेव के बिना मनुष्य अंधकार में पड़ा रहता है।.How do sadguru happen 'भजो हो मन गुरु उधार, .. इस विषय में पूरी जानकारी के लिए इस पद का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी किया गया है । इसके बारे में अच्छी तरह जानने के लिए पढ़ें-

P86, How do sadguru happen 'भजो हो मन गुरु उधार, ...' महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित। पदावली पद 86  अर्थ सहित चित्र एक
पदावली पद 86 अर्थ सहित चित्र एक

P86, How do sadguru happen 'भजो हो मन गुरु उधार, ...' महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित। पदावली पद 86 अर्थ सहित चित्र दो
पदावली पद 86 अर्थ सहित चित्र दो

P86, How do sadguru happen 'भजो हो मन गुरु उधार, ...' महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित। पदावली पद 86 अर्थ सहित चित्र 3
पदावली पद 86 अर्थ सहित चित्र 3

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प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के भारती पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" के भजन नं. 86 का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के द्वारा आपने जाना कि जीवन में सद्गुरु की बड़ी आवश्यकता है । सदगुरु कैसा होना चाहिए? इस भजन में अच्छी तरह बताया गया है। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले  पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। इस पद का पाठ किया गया है उसे सुननेे के लिए निम्नलिखित वीडियो देखें।




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