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7/03/2020

सूरदास 18, Where does god live । अविगत गति कछु कहत न आवै । भजन भावार्थ सहित । -स्वामी लालदास।

संत सूरदास की वाणी  / 18

प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज प्रमाणित करते हुए "संतवाणी सटीक"  भारती (हिंदी) पुस्तक में लिखते हैं कि सभी संतों का मत एक है। इसके प्रमाण स्वरूप बहुत से संतों की वाणीओं का संग्रह कर उसका शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी किया गया हैं। इसके अतिरिक्त भी "सत्संग योग" और अन्य पुस्तकों में संतवाणीयों का संग्रह है। जिसका टीकाकरण पूज्यपाद लालदास जी महाराज और अन्य टीकाकारों ने किया है। यहां "संतवाणी-सुधा सटीक" में प्रकाशित भक्त  सूरदास जी महाराज  की वाणी "अविगत गति कछु कहत न आवै,...'  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणियों को पढेंगे। 

इस भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन, पद्य, वाणी, छंद) "अविगत गति कछु कहत न आवै । ,..." में बताया गया है कि-   परब्रह्म या परम-ब्रह्म ब्रह्म का वो रूप है, जो निर्गुण और असीम है। "नेति-नेति" करके इसके गुणों का वर्णन किया गया है।  ब्रह्म कौन है? परम-तत्त्व के निराकार स्वरूप को ब्रह्म कहते है। ब्रह्म का स्वरूप निर्गुण और असीम है। ब्रह्म जगत् का कारण है, यह ब्रह्म का तटस्थ लक्षण है । जो तुम्हारा अपना स्वरूप है , वह ब्रह्म है । ओमकार जिनका स्वरूप है, ओम जिसका नाम है, उस ब्रह्म को ही ईश्‍वर, परमेश्वर, परमात्मा, प्रभु आदि कहते हैं। ब्रह्म क्या है? ब्रह्म-स्वरूप क्या है? ईश्वर कहां रहता है? इन बातों के साथ-साथ निम्नलिखित प्रश्नों के भी कुछ-न-कुछ समाधान पायेंगे। जैसे कि-     ब्रह्म का स्वरूप क्या है, पूर्ण ब्रह्म क्या है,  परब्रह्म क्या है, ब्रह्म ज्ञान का अर्थ, परमात्मा का स्वरूप क्या है? ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्या श्लोक,  ब्रह्म क्या है? ब्रह्म का विलोम,परब्रह्म शिव आत्मा का स्वरुप क्या है? परमात्मा का मतलब क्या होता है? परमात्मा क्या है? ब्रह्म,  इत्यादि बातों को समझने के पहले, आइए ! भक्त सूरदास जी महाराज का दर्शन करें। 

इस भजन के पहले वाले पद्य  "झूठेही लगि जनम गँवायौ" को भावार्थ सहित पढ़ने के लिए  यहां दबाएं।

अविगत गति कछु कहत न आवै
अविगत गति कछु कहत न आवै

सूरदास 16, What does god want from us । सबसों ऊँची प्रेम सगाई । भजन भावार्थ सहित । -महर्षि मेंहीं

संत सूरदास की वाणी  /  16

प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज प्रमाणित करते हुए "संतवाणी सटीक"  भारती (हिंदी) पुस्तक में लिखते हैं कि सभी संतों का मत एक है। इसके प्रमाण स्वरूप बहुत से संतों की वाणीओं का संग्रह कर उसका शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी किया गया हैं। इसके अतिरिक्त भी "सत्संग योग" और अन्य पुस्तकों में संतवाणीयों का संग्रह है। जिसका टीकाकरण पूज्यपाद लालदास जी महाराज और अन्य टीकाकारों ने किया है। यहां "संत-भजनावली सटीक" में प्रकाशित भक्त  सूरदास जी महाराज  की वाणी "सबसों ऊँची प्रेम सगाई,...'  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणियों को पढेंगे। 

इस भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन, पद्य, वाणी, छंद) "मेरो मन अनत कहाँ सुख पावै । ,..." में बताया गया है कि-   " क्या रिश्ता है इंसान का ईश्वर से? हम उसे कैसे पा सकते हैं? परन्तु यह एक विचारणीय प्रश्न है। ज़िंदगी का मकसद क्या है? ईश्‍वर से प्रार्थना करें, तो हमें क्या फायदे हो सकते हैं?  मनुष्य धर्म के द्वारा क्या पा सकता है?  इन बातों के साथ-साथ निम्नलिखित प्रश्नों के भी कुछ-न-कुछ समाधान पायेंगे। जैसे कि-  क्या ईश्वर सत्य है, ईश्वर एक है, ईश्वर का स्वरूप, सबसे बड़ा ईश्वर कौन है, वेदों के अनुसार ईश्वर कौन है, वेदों में ईश्वर का स्वरूप, क्या ईश्वर का अस्तित्व है, भगवान और परमात्मा में अंतर, ईश्वर इन इंग्लिश, Ishwar, ईश्वर अजन्मा है, ईश्वर की सत्ता,, इत्यादि बातों को समझने के पहले, आइए ! भक्त सूरदास जी महाराज का दर्शन करें। 

इस भजन के पहले वाले पद्य  "मेरो मन अनत कहाँ सुख पावै" को भावार्थ सहित पढ़ने के लिए  यहां दबाएं।

सबसों ऊँची प्रेम सगाई भजन गाते हुए भक्त सूरदास जी महाराज और टीकाकार
सबसों ऊँची प्रेम सगाई भजन गाते हुए भक्त सूरदास

7/02/2020

सूरदास 11, Examples of exclusive devotion । तुम तजि और कौन पै जाऊँ । भजन भावार्थ सहित । -महर्षि मेंहीं

संत सूरदास की वाणी  / 11

प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज प्रमाणित करते हुए "संतवाणी सटीक"  भारती (हिंदी) पुस्तक में लिखते हैं कि सभी संतों का मत एक है। इसके प्रमाण स्वरूप बहुत से संतों की वाणीओं का संग्रह कर उसका शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी किया गया हैं। इसके अतिरिक्त भी "सत्संग योग" और अन्य पुस्तकों में संतवाणीयों का संग्रह है। जिसका टीकाकरण पूज्यपाद लालदास जी महाराज और अन्य टीकाकारों ने किया है। यहां "संत-भजनावली सटीक" में प्रकाशित भक्त  सूरदास जी महाराज  की वाणी " तुम तजि और कौन पै जाऊँ,... '  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणियों को पढेंगे। 
एकनिष्ठ भक्ति और उपासना भगवान से मिला देती है । शुद्धभक्त सदैव भगवान कृष्ण के विभिन्न रूपों में से किसी एक की भक्ति में लगा रहता है। परमात्मा की एकनिष्ठ भक्ति करके कवि और ईश्वर एक होकर अभिन्न हो गए हैं। ।  एकनिष्ठ प्रेमवाले भक्त केवल कृष्ण को अपना ईष्ट माना है ।   इसी एकनिष्ठा को प्रकट करते हुए भक्त संत सूरदास जी महाराज इस भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन, पद्य, वाणी, छंद) "तुम तजि और कौन पै जाऊँ ,..." में कहते है-  " हे श्रीकृष्ण ! मैं आपकी शरण छोड़कर दूसरे किसकी शरण में जाऊँ ! आप ही बताइए , मैं अपने इच्छित पदार्थ की प्राप्ति के लिए किसके द्वार जाकर उसके आगे अपना सिर झुकाऊँ ( उससे प्रार्थना करूँ ) और कहाँ जाकर किसके हाथ बिक जाऊँ ( किसकी दासता स्वीकार करूँ )। जैसे कि-   सूरदास जी, सूरदास की भक्ति भावना, सूरदास तस्वीरें, सूरदास का काव्य सौन्दर्य, सूरदास - कविता कोश, सूरदास की भाषा शैली, आशा एक राम जी से,एकनिष्ठ भक्ति के उदाहरण, इत्यादि बातों को समझने के पहले आइए भक्त सूरदास जी का दर्शन करें। 

इस भजन के पहले वाले पद्य  "मो सम कौन कुटिल खल कामी ।..." को पढ़ने के लिए     यहां दबाएं।

एक निष्ठ भक्ति भजन गाते हुए भक्त सूरदास जी महाराज और टीकाकार लाल दास जी महाराज।
एकनिष्ठ-भक्ति भजन गाते भक्त सूरदास जी

7/01/2020

सूरदास 08, What is the promise of god । प्रभु मेरे औगुन चित न धरो । भजन भावार्थ सहित । -महर्षि मेंहीं

संत सूरदास की वाणी  / 08

प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज प्रमाणित करते हुए "संतवाणी सटीक"  भारती (हिंदी) पुस्तक में लिखते हैं कि सभी संतों का मत एक है। इसके प्रमाण स्वरूप बहुत से संतों की वाणीओं का संग्रह कर उसका शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी किया गया हैं। इसके अतिरिक्त भी "सत्संग योग" और अन्य पुस्तकों में संतवाणीयों का संग्रह है। जिसका टीकाकरण पूज्यपाद लालदास जी महाराज और अन्य टीकाकारों ने किया है। यहां "संत-भजनावली सटीक" में प्रकाशित भक्त  सूरदास जी महाराज  की वाणी "प्रभु मेरे औगुन चित न धरो... '  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणियों को पढेंगे। 

इस भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन, पद्य, वाणी, छंद) "प्रभु मेरे औगुन चित न धरो,..." में सूरदास जी महाराज ने बताया है।   हे मेरे ईश्वर !हमारे अवगुण को अपने हृदय में धारण मत कीजिए। बल्कि आप अपने स्वभाव के अनुसार काम कीजिए। इसके अतिरिक्त निम्नलिखित बातों का भी कुछ न कुछ समाधान हुआ है जैसे कि   कविता कोश, शंकर भगवान का भजन,भगवान का भक्ति भजन,राम भगवान के भजन,भगवान का गाना,जंभेश्वर भगवान का भजन,बुद्ध भगवान के भजन,कृष्ण भगवान के भजन mp3,भगवानों के भजन इत्यादि बातों को समझने के पहले आइए भक्त सूरदास जी का दर्शन करें। 

इस भजन के पहले वाले पद्य  "जो जन ऊधो मोहि न बिसरै ।..." को पढ़ने के लिए    यहां दबाएं।

प्रभु मेरे अवगुण चित ना धरो,.. भजन गाते हुए भक्त सूरदास जी महाराज और उसका भावार्थ करते टीकाकार स्वामी लालदास जी।
प्रभु मेरे औगुन चित न धरो । भजन भावार्थ सहित 

6/30/2020

सूरदास 06, True worship of god । जो मन कबहुँक हरि को जाँचे । भजन भावार्थ सहित । महर्षि मेंहीं

संत सूरदास की वाणी  / 06

प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "संतवाणी सटीकअनमोल कृति है। इस कृति में बहुत से संतवाणीयों को एकत्रित करके सिद्ध किया गया है कि सभी संतों का एक ही मत है। इसी कृति में संत सूरदास जी महाराज  की वाणी "जो मन कबहुँक हरि को जाँचे ।..." का  भावार्थ सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज ने   किया है। 

ईश्वरोपासना ही मोक्ष के असली साधन है । अतः ईश्वर भक्ति के संबंध में विविध तरह के विचार प्रचलित हैं। उनमें आत्म संतुष्टि दायक, सर्व सिद्धि प्रदाता, सर्व मनोकामना पूर्ण करने वाला, सभी दुखों से छुड़ाने वाला ईश्वर का असली भक्ति क्या है? इस भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन, पद्य, वाणी, छंद) "जो मन कबहुँक हरि को जाँचे।,..." में सूरदास जी महाराज ने बताया है। प्रायः लोग निम्नलिखित बातों में उलझ कर रह जाते हैं और असली भक्ति नहीं कर पाते हैं जैसे कि-  ईश्वर पूजा में जप, ध्यान, प्राणायाम का साधन आदि। हिन्दू धर्म के ग्रंथ वेद में ईश्वर को 'ब्रह्म' कहा गया है। ब्रह्म को प्रणव, सच्चिदानंद, परब्रह्म भी कहा जाता है।  गुरु को ईश्वर का तारक रूप माना जाता है।  इसलिए इन दोनों रूपों की उपासना आज तक लोग करते आए हैं। ईश्वर-उपासना करते हुए, विषय, धन, जन अथवा मान-यश की कामना करने पर से मुक्ति की सिद्धि नहीं होती है। आपत्त, रोग, शोक, ताप, मान और अपमान इत्यादि ईश्वर भक्ति में बाधक होते हैं। अगर सबकुछ नियतिबद्ध है तो ईश्वर का चमत्कार का क्या मतलब है।मात्र एक ईश्वर ही सबसे महान है और उपासना परमात्मा की असली पहचान कराने वाला। आदि बातें। इन बातों को समझने के पहले आइए भक्त सूरदास जी महाराज का दर्शन करें।

इस भजन के पहले वाले पद्य "जौं लौं सत्य स्वरूप न सूझत।..." को पढ़ने के लिए    यहां दबाएं।

ईश्वर भक्ति का असली भेद बताते हुए भक्त सूरदास जी महाराज और भगवान श्री कृष्ण।
ईश्वर भक्ति का असली रहस्य

Surdas 03, Why god worship । ताते सेइये यदुराई । भजन भावार्थ सहित

संत सूरदास की वाणी  / 03

प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "संतवाणी सटीकअनमोल कृति है। इस कृति में बहुत से संतवाणीयों को एकत्रित करके सिद्ध किया गया है कि सभी संतों का एक ही मत है। इसी कृति में  संत सूरदास जी महाराज   की वाणी  'ताते सेइये यदुराई'...' का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी किया गया है। जिसे पूज्यपाद सद्गुरु  महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज ने लिखा है।
यह ( poems,  rachna, bhajan, kavya, pad, waani ) भक्त  सूरदास जी महाराज के हिंदी रचना के हैं। जिसमें इन्होंने ईश्वर भक्ति क्यों करना चाहिए? इस पर प्रकाश डाला है।साथ ही निम्नलिखित बातों पर भी कुछ न कुछ चर्चा हुआ है जैसे कि- ईश्वर भक्ति क्यों करना चाहिए ? hindi kavya rachna, surdas ke pad, surdas poems, surdas bhajan list, surdas poems with meaning, surdas ke poems small with meaning, surdas ke pad hindi mai, ईश्वर भक्ति के भजन, ishwar bhakti Geet, ishwar bhakti Bhajan, ishwar bhakti geet, भक्ति, भक्ति के गाने, भक्ति के गाना, भक्ति के भजन, भक्ति के गीत, भक्ति के गाना वीडियो, भक्ति के प्रकार, भक्ति के रसिया,भक्ति के बस में भगवान आदि बातें। इन बातों को पढ़ने के पहले आइए ! भक्त सूरदास जी महाराज और टीकाकार के संयुक्त  दर्शन करें।

इस भजन के  पहले वाले पद्य को पढ़ने के लिए    यहां दबाएं।

ईश्वर भक्ति पर चर्चा करते हुए भक्त सूरदास जी महाराज और टीकाकार सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज।
ईश्वर भक्ति की आवश्यकता पर चर्चा।

सूरदास 02, Glimpse of god । अपने जान मैं बहुत करी । भजन भावार्थ सहित

संत सूरदास की वाणी  / 02 

प्रभुप्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "संतवाणी सटीकअनमोल कृति है। इस कृति में बहुत से संतवाणीयों को एकत्रित करके सिद्ध किया गया है कि सभी संतों का एक ही मत है। इसी कृति में संत सूरदास जी महाराज  की वाणी 'अपने जान मैं बहुत करी'...' का भावार्थ किया गया है ।जिसे पूज्यपाद सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज ने लिखा है।

यह पद्य ( poems,  rachna, bhajan, kavya, pad, waani )  सूरदास जी महाराज के हिंदी रचनाओं में है। इसमें कृष्ण भगवान के दर्शन, हरि दर्शन,प्रभु दर्शन, ईश्वर दर्शन, भगवान् के दर्शन के बारे में चर्चा किया गया है कि prabhu darshan se sukh sampada kase aati hai. prabhu darshan kase milega, क्या केवल  darshan de do,aja prabhu इस तरह कहना काफी है या tumhare darshan ki Bela में ही ईश्वर का दर्शन होगा।... आदि बातों पर प्रकाश डालता है। तो आइए इन बातों को जानने के पहले भक्त सूरदास जी महाराज और टीकाकार जी के दर्शन करें।

इस भजन के  पहले वाले पद्य को पढ़ने के लिए    यहां दबाएं।

ईश्वर दर्शन के लिए भजन गाते भक्त सूरदास जी महाराज और भजन सुनते हुए टीकाकार सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज ।
ईश्वर दर्शन के लिए भजन गाते भक्त सूरदास

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