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P01, (क) How is god? "सब क्षेत्र क्षर अपरा परा पर,...'' महर्षि मेंहीं ईश-स्तुति भजन अर्थ सहित

महर्षि मेंहीं पदावली / 01 (क)

प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 01 ला पद्य  "सब क्षेत्र क्षर अपरा परा पर....''  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में। जिसे पूज्यपाद लालदास जी महाराज नेे किया है। 
इस ईश्वर संबंधित ( कविता, पद्य, वाणी ) की विशेषता यह है कि इसमेें- ईश्वर क्या है, सबसे बड़ा ईश्वर कौन है,सच्चा ईश्वर कौन है, ईश्वर एक है, ईश्वर और भगवान में अंतर, ईश्वर का स्वरूप, ईश्वर,सच्चा ईश्वर कौन और कहा है उसका नाम और पता क्या है, ईश्वर का शाब्दिक अर्थ, गीता के अनुसार ईश्वर का स्वरूप, ईश्वर शक्ति,भगवान का अर्थ, आदि पर विशेष रूप से चर्चा हुई है । 
इस पद को संतमत सत्संग के प्रातः कालीन सत्संग में ईश-स्तुति के रूप में गाते हैं। अगर आप  संतमत सत्संग की  अपराह्ण, सायंकालीन स्तुति-प्रार्थना को पढ़ना, सुनना चाहते हैं तो         यहां दबाएं। 

P01, (क)  How is god? "सब क्षेत्र क्षर अपरा परा पर,...'' महर्षि मेंहीं ईश-स्तुति भजन अर्थ सहित। ईश्वर स्वरूप का वर्णन करते हुए गुरुदेव और टीकाकार
ईश्वर स्वरूप का वर्णन करते हुए गुरुदेव और टीकाकार

How is god? "सब क्षेत्र क्षर अपरा परा पर,...''

    सद्गुरु  महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज जी  कहते हैं- संतमत सत्संग की प्रातःकालीन स्तुति-प्रार्थना का प्रथम पद कहता है कि "परमात्मा सब शरीरों ( स्थूल, सूक्ष्म, कारण, महाकारण, और कैवल्य) से रहित है। वह क्षर,  अपराध, सगुण, तथा असत् कही जानेवाली जड़ प्रकृति और अक्षर, परा, निर्गुण तथा सत् कही जानेवाली चेतन प्रकृति से भी श्रेष्ठ तथा उपर है।.How is god? "सब क्षेत्र क्षर अपरा परा पर.." इस विषय में पूरी जानकारी के लिए इस भजन का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी किया गया है। उसे पढ़े-


P01, (क)  How is god? "सब क्षेत्र क्षर अपरा परा पर,...'' महर्षि मेंहीं ईश-स्तुति भजन अर्थ सहित। पदावली भजन एक और शब्दार्थ।
पदावली भजन एक और शब्दार्थ

P01, (क)  How is god? "सब क्षेत्र क्षर अपरा परा पर,...'' महर्षि मेंहीं ईश-स्तुति भजन अर्थ सहित। पदावली भजन एक का शब्दार्थ
पदावली भजन एक का शब्दार्थ

P01, (क)  How is god? "सब क्षेत्र क्षर अपरा परा पर,...'' महर्षि मेंहीं ईश-स्तुति भजन अर्थ सहित। पदावली भजन एक का शब्दार्थ चित्र दो
पदावली भजन एक का शब्दार्थ चित्र दो

P01, (क)  How is god? "सब क्षेत्र क्षर अपरा परा पर,...'' महर्षि मेंहीं ईश-स्तुति भजन अर्थ सहित। पदावली भजन एक का भावार्थ
पदावली भजन एक का भावार्थ
इस पद्य के शेष भावार्थ को दूसरे पोस्ट में पढ़ेंगे।  दूसरे पोस्ट को पढ़ने के लिए    यहां दबाएं । 

प्रभु प्रेमियों ! ईश-स्तुति नामक इस पद की सबसे बड़ी महिमा यह है कि अगर कोई ईश्वर के स्वरूप को अपने बुद्धि-विचार से भी अच्छी तरह से समझ जाता है, तो उसे मृत्यु के बाद मनुष्य का शरीर ही प्राप्त होगा । वह दूसरी योनि में नहीं जाएगा। ईश्वरीय-ज्ञान की ऐसी महिमा है। देखें उपनिषद वाक्य-

P01, (क)  How is god? "सब क्षेत्र क्षर अपरा परा पर,...'' महर्षि मेंहीं ईश-स्तुति भजन अर्थ सहित। ईश्वर स्वरूप की महिमा/ईश्वरीय ज्ञान की महिमा
ईश्वरीय-ज्ञान की महिमा

संतमत सत्संग के प्रातः कालीन स्तुति प्रार्थना कैसे की जाती है इसे स्वामी युगलानंद जी महाराज के स्वर में सुनने के लिए       यहां दबाएं । 

  प्रभु प्रेमियों !  "महर्षि मेंहीं पदावली शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी सहित" नामक पुस्तक  से इस भजन के शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी द्वारा आपने जाना कि अगर कोई ईश्वर के स्वरूप को अपने बुद्धि-विचार से भी अच्छी तरह से समझ जाता है, तो उसे मृत्यु के बाद मनुष्य का शरीर ही प्राप्त होगा । वह दूसरी योनि में नहीं जाएगा  इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट-मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले  पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। इस पद्य का पाठ किया गया है उसे सुननेे के लिए निम्नांकित वीडियो देखें।



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