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P33, What is Drishti Yoga and its benefits 'ध्यानाभ्यास करो सद सद ही,...' महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित

महर्षि मेंहीं पदावली / 33

      प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 33वां, पद्य- "ध्यानाभ्यास करो सद सद ही,..." का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में। जिसे पूज्यपाद लालदास जी महाराज नेे किया है।

इस सद्गुरु भजन (कविता, पद्य, वाणी, छंद, भजन) "ध्यानाभ्यास करो सद सद ही,..." में बताया गया है कि- दृष्टि योग न तो Sani ki drishti है, न ही  mangal ki drishti ka prabhav न ही sabhi graho ki drishti graha drishti बल्कि यह एक रहस्यमय विद्या हैै, जिसे न तो surya ki drishti, न ही chandra ki drishti, न ही graho ki drishti chart से प्राप्त हो सकता है। यह सिर्फ संत सद्गुरु की कृपा दृष्टि से ही प्राप्त हो सकती है। आदि ।

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P33, What is Drishti Yoga and its benefits 'ध्यानाभ्यास करो सद सद ही,...' महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित। सद्गुरु महर्षि मेंहीं और टीकाकार
सद्गुरु महर्षि मेंहीं और टीकाकार

What is Drishti Yoga and its benefits

सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज जी  कहते हैं-कि हे मेरे प्रिय जनों ! ध्यान का अभ्यास खूब किया करो । ध्यान में सबसे कठिन साधन है- दृष्टि योग । इसे खूब मजबूती के साथ करते करते-करते इसमें सफलता मिलती है। इस विषय में पूरी जानकारी के लिए इस पद का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी किया गया है । इसके बारे में अच्छी तरह जानने के लिए निम्नांकित चित्र में पढ़ें-

P33, What is Drishti Yoga and its benefits 'ध्यानाभ्यास करो सद सद ही,...' महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित। महर्षि मेंहीं पदावली भजन 33 और शब्दार्थ।
महर्षि मेंहीं पदावली भजन 33, शब्दार्थ।

P33, What is Drishti Yoga and its benefits 'ध्यानाभ्यास करो सद सद ही,...' महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित। पदावली भजन 33, शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी।
पदावली भजन 33 शब्दार्थ भावार्थ और टिप्पणी।

P33, What is Drishti Yoga and its benefits 'ध्यानाभ्यास करो सद सद ही,...' महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित। पदावली भजन 33 टिप्पणी।
पदावली भजन 33 टिप्पणी

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पदावली भजन 33 का शेष टिप्पणी।

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प्रेमियों ! गुरु महाराज के भारती पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" के भजन नं. 33 का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के द्वारा आप ने जाना कि दृष्टि योग क्या है और इसे कैसे करना चाहिए। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले  पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। इस पद का पाठ किया गया है उसे सुननेे के लिए निम्नलिखित वीडियो देखें।



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