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P111, Importance of the Guru's grace, "बिना गुरु की कृपा पाये,...'' महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित

महर्षि मेंहीं पदावली / 111

    प्रभु प्रेमियों ! संतवाणी अर्थ सहित में आज हम लोग जानेंगे- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "महर्षि मेंहीं पदावली" जो हम संतमतानुयाइयों के लिए गुरु-गीता के समान अनमोल कृति है। इस कृति के 111वां पद्य  "बिना गुरु की कृपा पाये....''  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी के  बारे में; जिसे पूज्यपाद लालदास जी महाराज नेे किया है। 

इस गुरु कृपा भजन ( गुरु भजन, गुरु का महत्व की कविता, गुरु कृपा पंद्य, गुरु कृपा वाणी ) में  जीवन में गुरु का महत्व, गुरु और शिष्य का संबंध, गुरु कृपा ही केवलम, गुरु का अर्थ, गुरु कृपा सड़क पर पड़ी नहीं मिलती, गुरु कौन है? सद्गुरु कौन है? असली गुरु कौन है? पूर्ण गुरु कौन है? गुरु की आवश्यकता क्यों है? आदि बातों का कुछ-ना-कुछ  समाधान दिया गया है।

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P111, Importance of the Guru's grace, "बिना गुरु की कृपा पाये,...''  महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित। जीवन में गुरु कृपा की आवश्यकता पर चर्चा करते गुरुदेव।
जीवन में गुरु कृपा की आवश्यकता पर चर्चा करते गुरुदेव।

Importance of the Guru's grace

 सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज जी  कहते हैं- गुरु की कृपा पाए बिना जीवों का अथवा मनुष्य-जीवन का कभी उद्धार नहीं हो सकता। जीवन में गुरु का कितना महत्व है। इस बात को अनुभव कर के गुरु महाराज कहते हैं, मुझे जीवन में गुरु के अलावा और कोई सच्चा सहारा ही नजर नहीं आता है। इसलिए मैं केवल गुरु के ही आश्रय हूं।.Importance of the Guru's grace, "बिना गुरु की कृपा पाये,..छ.. " इस विषय में पूरी जानकारी के लिए इस पद का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी किया गया है । उसे पढ़ें-

P111, Importance of the Guru's grace, "बिना गुरु की कृपा पाये,...''  महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित। पदावली भजन नंबर 111 और शब्दार्थ भावार्थ।
पदावली भजन नंबर 111 और शब्दार्थ भावार्थ।

P111, Importance of the Guru's grace, "बिना गुरु की कृपा पाये,...''  महर्षि मेंहीं पदावली भजन अर्थ सहित। पदावली भजन नंबर 111 का शेष भावार्थ और टिप्पणी।
पदावली भजन नंबर 111 का शेष भावार्थ और टिप्पणी।

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प्रभु प्रेमियों !  "महर्षि मेंहीं पदावली शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी सहित" नामक पुस्तक  से इस भजन के शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी द्वारा आपने जाना कि गुरु की कृपा पाए बिना जीवों का अथवा मनुष्य-जीवन का कभी उद्धार नहीं हो सकता। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस लेख के बारे में अपने इष्ट-मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी इससे लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले  पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। इस पद्य का पाठ किया गया है उसे सुननेे के लिए निम्नांकित वीडियो देखें।



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