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7/16/2020

नानक वाणी 08, The name and hymn in the world is the essence । सुनि मन भूले बावरे । भजन भावार्थ सहित

गुरु नानक साहब की वाणी / 08

प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की भारती (हिंदी) पुस्तक "संतवाणी सटीक" एक अनमोल कृति है। इस कृति में बहुत से संतवाणीयों को एकत्रित करके सिद्ध किया गया है कि सभी संतों का एक ही मत है। इसी कृति में  संत श्री गुरु नानक साहब जी महाराज   की वाणी  ''सुनि मन भूले बावरे,...'' का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी किया गया है। जिसे पूज्यपाद  सद्गुरु महर्षि  मेंहीं परमहंस जी महाराज ने लिखा है। उसी के बारे मेंं यहां जानकारी दी जाएगी।

इस भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन, पद्य, वाणी, छंद)  में बताया गया है कि- नाम की महिमा अपरंपार है।  नाम का स्मरण करके सदाशिव भोले शंकर भी अपने कण्ठ-स्थित बिष के प्रभाव को नष्ट करते हैं। तो हम सांसारिक लोग नाम मंत्र, नाम फल, नाम का महत्व, नाम की महिमा, नाम की शक्ति, नाम जप से लाभ, नाम की सिद्धि, नाम जप की महिमा से अनभिज्ञ रहैं, यह बात  गुरु नानक साहब जी को नहीं भाया और इस वाणी के द्वारा उन्होंने हमें इसकी जानकारी दी। संसार में नाम भजन ही सार है।  इन बातों के साथ-साथ निम्नलिखित प्रश्नों के भी कुछ-न-कुछ समाधान पायेंगे। जैसे कि- गुरु नानक की अमृतवाणी, गुरु नानक जी की गुरबाणी, गुरु नानक दी बानी, गुरु नानक देव जी दी बानी, गुरु नानक देव जी के भजन, बाबे नानक दी वाणी, गुरु वाणी गुरु वाणी, इत्यादि बातों को समझने के पहले, आइए ! भक्त नानक साहब जी महाराज का दर्शन करें।

इस भजन के पहले वाले भजन  ''तारा चड़िया लंमा.'' को भावार्थ सहित पढ़ने के लिए   यहां दबाएं।

नाम महिमा का उच्चारण करते सतगुरु बाबा नानक साहब जी महाराज।
नाम महिमा का उच्चारण करते बाबा नानक

7/04/2020

सूरदास 20, Maya and Moksha Accurate Analysis । अपुनपौ आपुन ही विसर्यो । भजन भावार्थ सहित -स्वामीलालदास

संत सूरदास की वाणी  / 20

प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज प्रमाणित करते हुए "संतवाणी सटीक"  भारती (हिंदी) पुस्तक में लिखते हैं कि सभी संतों का मत एक है। इसके प्रमाण स्वरूप बहुत से संतों की वाणीओं का संग्रह कर उसका शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी किया गया हैं। इसके अतिरिक्त भी "सत्संग योग" और अन्य पुस्तकों में संतवाणीयों का संग्रह है। जिसका टीकाकरण पूज्यपाद लालदास जी महाराज और अन्य टीकाकारों ने किया है। यहां "संतवाणी-सुधा सटीक" में प्रकाशित भक्त  सूरदास जी महाराज  की वाणी "अपुनपौ आपुन ही विसर्यो,...'  का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणियों को पढेंगे। 

इस भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन, पद्य, वाणी, छंद) "अपुनपौ आपुन ही विसर्यो। ,..." में बताया गया है कि-   मोक्ष क्या है? मोक्ष का सामान्य अर्थ दुखों का विनाश है। दुखों के आत्यन्तिक निवृत्ति को ही मोक्ष कहते हैं।  मोक्ष का अर्थ जन्म और मरण के चक्र से मुक्त होने अलावा सर्वशक्तिमान बन जाना है। मोक्ष का अर्थ होता है मुक्ति। अधिकतर लोग समझते हैं कि मोक्ष का अर्थ जीवन-मरण के चक्र से छूट जाना। भारतीय दर्शनों में कहा गया है कि जीव अज्ञान के कारण ही बार बार जन्म लेता और मरता है । इस जन्ममरण के बंधन से छूट जाने का ही नाम मोक्ष है । जब मनुष्य मोक्ष प्राप्त कर लेता है, तब फिर उसे इस संसार में आकर जन्म लेने की आवश्यकता नहीं होती ।    इन बातों के साथ-साथ निम्नलिखित प्रश्नों के भी कुछ-न-कुछ समाधान पायेंगे। जैसे कि-  मुक्ति और मोक्ष में क्या अंतर है, मोक्ष कब मिलता है, मुक्ति का मार्ग कौन सा है, मोक्ष कैसे प्राप्त करें,मोक्ष मंत्र,मोक्ष क्या है,मोक्ष का पर्यायवाची,मोक्ष नाम का अर्थ,मुक्ति और मोक्ष में क्या अंतर है, इत्यादि बातों को समझने के पहले, आइए ! भक्त सूरदास जी महाराज का दर्शन करें। 

इस भजन के पहले वाले पद्य  "जा दिन सन्त पाहुने आवत," को भावार्थ सहित पढ़ने के लिए  यहां दबाएं।

भजन गाते हुए भक्त सूरदास जी महाराज- अपुनपौ आपुन ही विसर्यो । भजन भावार्थ सहित -स्वामीलालदास
अपुनपौ आपुन ही विसर्यो

6/29/2020

कबीर वाणी 08 । Who are true heroes । सूर संग्राम को देखि भागे नहीं । शब्दार्थ, भावार्थ सहित

संत कबीर साहब के वाणी / 08

प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज प्रमाणित करते हुए "संतवाणी सटीक"  भारती (हिंदी) पुस्तक में लिखते हैं कि सभी संतों का मत एक है। इसके प्रमाण स्हवरूप बहुत से संतों की वाणीओं का संग्रह कर उसका शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी लिखी गई हैं। इनके अतिरिक्त  "सत्संग योग" और अन्य जगह भी संतवाणीयों का संग्रह है। जिसका टीकाकरण पूज्य पाद लाल दास जी महाराज ने किया है। यहां इनकी पुस्तक "संतवाणी-सुधा सटीक" पुस्तक से  संत श्री कबीर साहब जी महाराज की वाणी "सूर संग्राम को देखि भागे नहीं...'  साखी का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी पढेंगे। 

इस भजन में आप आएंगे के संत कबीर साहब कहते हैं कि "जो भक्ति करने वाले वीर हैं, वह किसी भी लड़ाई से डरते नहीं है। चाहे वह ध्यान अभ्यास में काम, क्रोध आदि विकारों से लड़ना हो, चाहे संयम करना हो, कहीं भी पीछे नहीं रहते । इसके साथ ही आप निम्न बातों पर भी कुछ ना कुछ पायेंगे। जैसे कि- संतवाणी अर्थ सहित,संतमत भजन, कबीर वाणी अर्थ सहित, bhakti geet, कबीर भजन, कबीर भजन निर्गुण, निर्गुण भजन हिंदी, kabir ke dohe, kabir vani, kabir saheb ke bhajan, kabir amritwani, कबीर साहब के अमृतवाणी, songs of kabir, bhakti bhajan hindi, दोहा शब्दार्थ, भावार्थ सहित, What make a true hero? What is a true hero essay? what is a hero, आदि बातें।

सदगुरु कबीर साहब के इस भजन के पहले वाले भजन को अर्थ सहित पढ़ने के लिए    यहां दबाएं।


संत कबीर साहब और टीकाकार, भजन पर विचार विमर्श करते।
वीरता का उपदेश देते हुए संत कबीर साहब और टीकाकार

कबीर वाणी 07 । Hindi bhajan Part of Bhakti । टोटे में भक्ति करै । दोहा शब्दार्थ, भावार्थ सहित

संत कबीर साहब की वाणी / 07

प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज प्रमाणित करते हुए "संतवाणी सटीक"  भारती (हिंदी) पुस्तक में लिखते हैं कि सभी संतों का मत एक है। इसके प्रमाण स्हवरूप बहुत से संतों की वाणीओं का संग्रह कर उसका शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी लिखी गई हैं। इनके अतिरिक्त  "सत्संग योग" और अन्य जगह भी संतवाणीयों का संग्रह है। जिसका टीकाकरण पूज्य पाद लाल दास जी महाराज ने किया है। यहां इनकी पुस्तक "संतवाणी-सुधा सटीक" पुस्तक से  संत श्री कबीर साहब जी महाराज की वाणी "टोटे में भक्ति करै...'  साखी
का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी पढेंगे। 

भक्तों ने अपनी भक्ति-भावना को कई तरह से व्यक्त किया है। जैसे कि परा भक्ति, नवधा भक्ति, रागानुगा भक्ति आदि अनेक प्रकार से । परंतु यहां संत कबीर साहब ने जो अपनी वाणी में भक्ति के बारे में जो बताया है वह सर्वसाधारण से लेकर महापुरुषों तक  सभी के लिए कल्याणकारी है। इसमें- भक्त की परिभाषा, नवधा भगति कहउँ तोहि पाहीं, म्हणजे काय, नवविधा, शबरी ज्ञान, संत कबीर साहब के दोहे अर्थ सहित, भक्ति का अंग, संतवाणी अर्थ सहित, संतमत भजन, कबीर वाणी का अर्थ, bhakti geet, कबीर भजन, कबीर भजन निर्गुण, निर्गुण भजन हिंदी, kabir ke dohe, kabir vani, kabir saheb ke bhajan, kabir amritwani, कबीर साहब के अमृतवाणी, songs of kabir, bhakti bhajan hindi, का सार ज्ञान आ गया है।

सदगुरु कबीर साहब के इस भजन के पहले वाले भजन को अर्थ सहित पढ़ने के लिए    यहां दबाएं।


सदगुरु कबीर साहब और टीकाकार स्वामी लालदास जी महाराज।
संत कबीर साहब और टीकाकार लाल दास जी

6/28/2020

कबीर वाणी 01 । Why is devotion required । सुमिरन बिना गोता खाओगे । चेतावनी भजन अर्थ सहित

संत कबीर साहब की बानी / 01

    प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "संतवाणी सटीकअनमोल कृति है। इसी कृति के एक अंग से   संत श्री कबीर साहब की वाणी "सुमिरन बिन गोता खाओगे...' भजन का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी पढेंगे। जिसे सद्गुरु महर्षि  मेंहीं परमहंस जी महाराज ने लिखा है।

 संत कबीर जी महाराज की इस भक्ति भजन (कविता, गीत,्भजन कीर्तन, पद्य, वाणी, छंद) "अति अहार यंद्री बल करें ।,..." में बताया गया है कि- सुमिरन का अर्थ क्या है? निरंकारी सुमिरन, सुमिरन क्यों न करे? कबीर दास की रचना, कबीर के दोहे मीठी वाणी, कबीर के दोहे धर्म पर,संत कबीर के दोहे,कबीर के दोहे साखी,चेतावनी दोहे,कर्म के दोहे,कबीर दास के भजन,कबीर वाणी अर्थ सहित,Kabir's hymns, Kabir Bhajan in Hindi, Kabir's couplets, Kabir Bhajan Vani, Kabir Bani, Kabir's post, Bhajan download of Kabir Sahib, Sadguru Kabir Sahab, Kabir Sahab narrated, Sumiran would eat without dive,कबीर के पद अर्थ सहित,कबीर वाणी अमृत संदेश, चेतावनी भजन, सुमिरन बिन गोता खाओगे,Why is devotion required आदि बातें।

सदगुरु कबीर साहब के इस भजन के पहले महायोगी गोरखनाथ जी महाराज की वाणी है। उसे अर्थ सहित पढ़ने के लिए    यहां दबाएं।


संत कबीर साहब और टीकाकार, टीकाकार- पूज्यपाद लालदास जी महाराज और कबीर साहब
संत कबीर साहब और टीकाकार

6/27/2020

नानक वाणी 01 । How to do yoga । जोगु न खिंथा जोग न डंडै । अर्थ सहित, टीकाकार- सद्गुरु महर्षि मेंहीं

गुरु नानक साहब की वाणी / 01

प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "संतवाणी सटीक" से संत श्री गुरु नानक साहब की वाणी "जोगु न खिंथा जोग न डंडै...' भजन का शब्दार्थ, भावार्थ और टिप्पणी पढेंगे। जिसे सद्गुरु महर्षि  मेंहीं परमहंस जी महाराज ने लिखा है।

संत सद्गुरु नानक साहब जी महाराज की इस God भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन,भजन कीर्तन, पद्य, वाणी, छंद) "जोगु न खिंथा जोग न डंडै,..." में बताया गया है कि- योग का क्या अर्थ है? योग क्या है?  योग के प्रकार? योग से क्या लाभ है? योग का अंतिम पड़ाव क्या है? योग का इतिहास, योग का महत्व, योग के लक्ष्य, योग के अंग, योग की विशेषताएं, योग कितने प्रकार के होते, शिक्षा और योग । इन बातों के साथ-साथ निम्नलिखित प्रश्नों के भी कुछ-न-कुछ उत्तर इस भजन में दिया गया है जैसे कि- नानक वाणी अर्थ सहित,गुरु नानक वाणी भजन,guru nanak dev ji ki bani,gurbani,guru nanak ji ki vani,nanak ke bhaja in hindi with meaning,guru nanak ki gurbani,gurbani video,योग कैसे करें? आदि बातें।

इस भजन के पहले संत कबीर साहब जी के भजनों को भावार्थ सहित पढ़ने के लिए   यहां दबाएं।


धन धन सतगुरु बाबा नानक शाहब जी महाराज, बाबा नानक, सतगुरु नानक, संत नानक साहब, संत नानक साहब भजन गाते हुए,
धन धन सतगुरु बाबा नानक साहब जी महाराज।

नानक वाणी 07 । Certification of inter-light by yoga । भजन- तारा चड़िया लंमा । भावार्थ सहित -महर्षिमेंहीं

गुरु नानक साहब की वाणी / 07

प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) पुस्तक "संतवाणी सटीकअनमोल कृति है। इस कृति में बहुत से संतवाणीयों को एकत्रित करके सिद्ध किया गया है कि सभी संतों का एक ही मत है। इसी कृति में  संत श्री गुरु नानक साहब जी महाराज   की वाणी  ''तारा चड़िया लंमा,....'' का शब्दार्थ, भावार्थ किया गया है। जिसे पूज्यपाद  सद्गुरु महर्षि  मेंहीं परमहंस जी महाराज नेे किया  हैै। उसी के बारे में यहांं चर्चा किया जा रहा है।

संत सद्गुरु नानक साहब जी महाराज की इस मेडिटेशन भजन (कविता, गीत, भक्ति भजन,भजन कीर्तन, पद्य, वाणी, छंद) "तारा चड़िया लंमा,..." में बताया गया है कि-  आंख बंद करने पर जो अंधकार दिखाई पड़ता हैै। उसमें योग युक्ति से देखने पर प्रकाश का भी दर्शन होता हैै। इस बात की साक्षी  गुरु नानक साहिब भी हैं। इसके साथ ही निम्न प्रश्नों के भी कुछ-न-कुछ उत्तर आपको मिलेगा। जैसे कि गुरु नानक की वाणी, नानक शब्द, गुरु नानक की वाणी हिंदी में, गुरु नानक के उपदेश,गुरु नानक देव के अनमोल विचार, गुरु नानक देव शब्द, गुरु नानक दे शब्द,गुरु नानक दी गुरबाणी, गुरु नानक देव जी के भजन, गुरु नानक की योग-साधना,गुरु नानक देव जी की वाणी, गुरु नानक के दोहे, गुरु नानक जी के भजन, शब्द कीर्तन, पंजाबी शब्द, गुरबाणी बाबे नानक दी, आदि बातें।

इस भजन के पहले वाले भजन ''काइआ नगरु नगर गड़ अंदरि,।..'' को भावार्थ सहित पढ़ने के लिए   यहां दबाएं।

तारा चड़िया लंमा.. उपदेश, गुरु नानक साहब अपने भक्तों के साथ, गुरबाणी का उपदेश करते बाबा नानक,
तारा चड़िया लंमा.. उपदेश

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