भक्त सूरदास जी एक परिचय
विकिपीडिया के अनुसार भक्त सूरदास जी महाराज का जन्म 1483ई० में रुनकता नामक गाँव में हुआ। यह गाँव मथुरा-आगरा मार्ग के किनारे स्थित है। कुछ विद्वानों का मत है कि सूर का जन्म सीही नामक ग्राम में एक निर्धन सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह बहुत विद्वान थे, उनकी लोग आज भी चर्चा करते है।--- मथुरा के बीच गऊघाट पर आकर रहने लगे थे। सूरदास के पिता, रामदास गायक थे। सूरदास के जन्मांध होने के विषय में मतभेद है। प्रारंभ में सूरदास आगरा के समीप गऊघाट पर रहते थे। वहीं उनकी भेंट श्री वल्लभाचार्य से हुई और वे उनके शिष्य बन गए। वल्लभाचार्य ने उनको पुष्टिमार्ग में दीक्षित कर के कृष्णलीला के पद गाने का आदेश दिया। सूरदास की मृत्यु गोवर्धन के निकट पारसौली ग्राम में १५८४ ईस्वी में हुई।
भक्त सूरदास जी भजन गाते हुए और टीकाकार |
सटीक भजनों की सूची
भक्त सूरदास जी महाराज के बहुत सारे भजन हैं। उनमें से जो भजन जीवन में बहुत ही उपयोगी और प्रसिद्ध है, उन भजनों का संग्रह करके पूज्यपाद संत सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज एवं पूज्यपाद लालदास जी महाराज ने उनकी टीका करके आम लोगों को भजन के सही मर्म को समझाया है। यहां उन्हीं भजनों की सूची है।
निम्नलिखित भजनों के बोल शब्द पर क्लिक करके आप उस भजन के बारे में विस्तार से जान सकेंगे।
- जग में जीवत ही को नातो, झूठे ही लगि जन्म गवायो
- अपने जान में बहुत करी।
- ताते सेइये यदुराई,
- गुरु बिन ऐसी कौन करें,
- जौं लौं सत्य स्वरूप न सूझत,
- जो मन कबहुंक हरि को जांचे
- जो जन ऊधो मोहि न बिसरै
- प्रभु मेरे अवगुण चित न धरो,
- रे मन मूरख जन्म गवायो।
- मो सम कौन कुटिल खल कामी
- तुम तजि और कौन पै जाऊँ
- सब दिन होत न एक समान,
- तुम मेरी राखो लाज हरी ।
- छाँड़ि मन हरि बिमुखन को संग ,
- मेरो मन अनत कहाँ सुख पावै
- सबसों ऊँची प्रेम सगाई,
- झूठेही लगि जनम गँवायौ,
- अविगत गति कछु कहत न आवै,
- जा दिन सन्त पाहुने आवत,
- अपुनपौ आपुन ही विसर्यो,
- अपुनपौं आपुन ही में पायो।
- अबके माधव मोहि उधारि।
- जा दिन मन पंछी उडि जैंहैं।
यहां पर उद्धृत संतवाणीयों का सटीक वर्णन के लिए निम्नलिखित पुस्तकों का सहारा लिया गया है-
इसमें सत्संग योग में वर्णित संतवाणीयों की टीका किया गया है। सत्संग योग में वर्णित जो संतवाणी इस पुस्तक में ना मिले उसे 'संतवाणी सटीक' में खोजना चाहिए। इस पुस्तक का टीकाकरण पूज्य पाद लाल दास जी महाराज ने किया है यह पुस्तक 'सत्संग ध्यान स्टोर' से ऑनलाइन मंगाया जा सकता है।
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भक्त सूरदास जी के भावार्थ सहित भजन-सूची Bhajan list with the devotion of devotee Surdas ji
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
6/22/2020
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